"भारतीय हस्तकरघा एवं हस्तनिर्मित वस्त्रों की वैश्विक मांग तथा निर्यात में उनकी भूमिका “
DOI:
https://doi.org/10.24113/kn14gr57Keywords:
हस्तकरघा उद्योग, हस्तनिर्मित वस्त्र, वैश्विक मांग, निर्यात प्रदर्शन, बुनकर अर्थव्यवस्था, नीतिगत हस्तक्षेपAbstract
भारतीय हस्तकरघा उद्योग न केवल देश की सांस्कृतिक पहचान का जीवंत प्रतीक है, बल्कि यह लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी है। कृषि के पश्चात यह देश में सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला असंगठित क्षेत्र है, फिर भी वैश्वीकरण, मशीनीकृत वस्त्रों की प्रतिस्पर्धा तथा बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के दबाव में यह उद्योग निरंतर चुनौतियों का सामना कर रहा है। प्रस्तुत अध्ययन "भारतीय हस्तकरघा एवं हस्तनिर्मित वस्त्रों की वैश्विक मांग तथा निर्यात में उनकी भूमिका" विषय पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य द्वितीयक आँकड़ों के आधार पर भारतीय हस्तकरघा उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में मांग-प्रवृत्तियों, निर्यात प्रदर्शन तथा इसे प्रभावित करने वाले आर्थिक व नीतिगत कारकों का विश्लेषण करना है। अध्ययन वस्त्र मंत्रालय, DGCIS, हस्तकरघा निर्यात संवर्धन परिषद, विश्व व्यापार संगठन तथा विश्व बैंक जैसे प्रामाणिक स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों पर आधारित है, तथा हिंदी एवं अंग्रेज़ी माध्यम के उपलब्ध शोध साहित्य की गहन समीक्षा के पश्चात तैयार किया गया है। समीक्षा से स्पष्ट होता है कि निर्यात सहायता कार्यक्रमों, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता तथा वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था के मध्य संबंधों पर पर्याप्त एकीकृत अध्ययन अनुपलब्ध है, जो एक महत्त्वपूर्ण शोध अंतराल को चिन्हित करता है। यह अध्ययन इसी अंतराल को भरने का प्रयास करते हुए यह प्रस्तुत करता है कि मजबूत नीतिगत हस्तक्षेप, डिज़ाइन नवाचार तथा डिजिटल व्यापार के द्वारा भारतीय हस्तकरघा उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता एवं निर्यात क्षमता को नई ऊँचाइयाँ प्रदान की जा सकती हैं।
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